♣♣♣ " ऊपर जिसका अंत नहीं उसे आसमां कहते हैं, और नीचे जिसका अंत नहीं उसे माँ कहते हैं..."

Thursday, 12 January 2012

‎" आबशारों की याद आती है , ...


‎" आबशारों की याद आती है ,
फिर किनारों की याद आती है .
जो नहीं हैं मग़र उन्ही से हूँ ,
उन नज़ारों की याद आती है. 
ज़ख्म पहले उभर के आते हैं ,
फिर हजारों की याद आती है. 
आईने में निहार कर खुद को ,
कुछ इशारों की याद आती है .
आसमाँ की सियाह रातों को ,
अब सिंतारों की याद आती है. 
शोर में कुछ भी याद क्या आये, 
बस पुकारों की याद आती है ."

Monday, 9 January 2012

इल्म बड़ी दौलत है...


"इल्म बड़ी दौलत है
तू भी स्कूल खोल
इल्म पढ़ा
फीस लगा
दौलत कमा
फीस ही फीस
पढाई के बीस
बस के तीस
यूनीफार्म के चालीस
खेलों के अलग
ये वैराइटी प्रोग्राम के अलग
लोगों के चीखने पर ना जा
दौलत कमा
उससे और स्कूल खोल
उससे और दौलत कमा
कमाए जा ...कमाए जा ..."

Wednesday, 4 January 2012

लेकिन मेरा लावारिस दिल...


मस्जिद तो अल्लाह की ठहरी 
मंदिर राम का निकला
लेकिन मेरा लावारिस दिल
अब जिस की जंबील में कोई ख्वाब 
कोई ताबीर नहीं है
मुस्तकबिल की रोशन रोशन
एक भी तस्वीर नहीं है
बोल ए इंसान, ये दिल, ये मेरा दिल
ये लावारिस, ये शर्मिन्दा शर्मिन्दा दिल
आख़िर किसके नाम का निकला 
मस्जिद तो अल्लाह की ठहरी
मंदिर राम का निकला
बंदा किसके काम का निकला
ये मेरा दिल है
या मेरे ख़्वाबों का मकतल
चारों तरफ बस खून और आँसू, चीखें, शोले
घायल गुड़िया
खुली हुई मुर्दा आँखों से कुछ दरवाजे
खून में लिथड़े कमसिन कुरते
जगह जगह से मसकी साड़ी
शर्मिन्दा नंगी शलवारें
दीवारों से चिपकी बिंदी
सहमी चूड़ी 
दरवाजों की ओट में आवेजों की कबरें
ए अल्लाह, ए रहीम, करीम, ये मेरी अमानत
ए श्रीराम, रघुपति राघव, ए मेरे मर्यादा पुरुषोत्तम
ये आपकी दौलत आप सम्हालें
मैं बेबस हूँ
आग और खून के इस दलदल में
मेरी तो आवाज़ के पाँव धँसे जाते हैं। 

Monday, 26 September 2011

बारिश की एक सर्द रात...



कोहनियों के ब़ल चलकर
चाँद आज कितना करीब आया है
कांच की खिड़की से सरकती
बारिश की बूंदों की
कतारें और शीशे के इस
पार भीगा हुआ मेरा मन
चांदनी में नहाये हुए कुछ ख्वाब
यादों की चादर भिगोने लगे
आँखों के समंदर में
घुलकर बह निकली एक
तम्मना तुमसे जुड़ने की 'आशु'
थरथराते होटों पे तुम्हारे
लबों का एहसास
एक गर्माहट से भर गयी
सर्द तूफानी रात
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-प्रस्तुतकर्ता
'आशु'